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रविवार, 16 अगस्त 2026

आओ माँ ( सासु माँ को समर्पित रचना



तुम्हारी फैली हथेलियों पर,

 मेहंदी से अनुराग लिखूँगी माँ!

गूँज रहा जो भीतर निशब्द,

जीवन का राग लिखूँगी माँ!


मंगल और शुभता के रंग खिलेंगे 

जब हम दोनों के हाथों में,

ये रंग न मंद पड़े कभी, रहे 

हमारा अमर सुहाग लिखूँगी माँ! 


एक माँ ने जन्म दिया,तुमने दिया 

 अपना जिगर का टुकड़ा मुझे,

तुम्हारे आँगन में महके पल- पल,

वो प्रेम पराग लिखूँगी माँ!


गृहस्थी का हुनर तराशा मैंने,

तुम्हारी मृदुल छाँव में!

तुम्हारी चौखट से जुड़ कैसे 

खुले मेरे भाग लिखूँगी माँ!