तुम्हारी फैली हथेलियों पर,
मेहंदी से अनुराग लिखूँगी माँ!
जो गूँज रहा भीतर निशब्द,
वो जीवन-राग लिखूँगी माँ! ✨
मंगल और शुभता के रंग खिलेंगे
जब हम दोनों के हाथों में,
ये रंग न मंद पड़े कभी, हमारा
अमर सुहाग लिखूँगी माँ! ✨
एक माँ ने दिया जन्म मुझे,
तुमसे जीवन-सहचर मिला!
तुम्हारे आँगन में महके पल-पल,
प्रेम-पराग लिखूँगी माँ! ✨
हुनर तराशा गृहस्थी का मैंने,
तुम्हारी मृदुल छाँव में!
तुमसे बाँटे मिल-बैठ सदा
स्नेहिल संवाद लिखूँगी माँ! ✨
जीवन को नई उड़ान मिली
जब आँगन में तुम्हारे उतरी माँ,
तुम्हारे रूप में मिला मुझे
इक आशीर्वाद लिखूँगी माँ!
तुम्हें माँ से बढ़कर पाया
मिला बेटी से ज्यादा मान सदा!
जुड़े जन्म-जन्म नाता तुमसे,
ये मन की साध लिखूँगी माँ! ❤️
✍️ **— रेणु**