तेरी एक पुकार पे पीहर
चली आती हूँ दौड़ी माँ!
बैठ फिर सुख -दुःख साझा करती
माँ बेटी की जोड़ी माँ!
बैकुंठ धाम- सा घर तेरा!
देख तृप्त हो जाऊँ माँ,
हर पीड़ा और चिंता से,
पल में मुक्त हो जाऊँ माँ!
स्नेह- ममता की नींव है जिसकी
तेरे त्याग की ईंट और रोड़ी माँ!
हँसी खुशी के रंग बिखरे
तेरा आँगन अजब अनूठा माँ!
तरुवर विशाल बन झूम रहा
संस्कार तेरे का बूटा माँ
इसके आगे फीकी जग की
ये माया लाख करोड़ी माँ!