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रविवार, 9 मार्च 2025

प्रेम तुमने क्या ना दिया?

प्रेम! तुमने क्या ना दिया।
 बैठ तुम्हारी मृदुल छाँव में
 बूँद बूँद प्रेम रस पीया! 

तुमने आ मुझे चुना
संग सपनों को बैठ बुना
मुझ से लिया बस बूँद -भर
लौटाया कई गुना! 
तुममें हो कर लीन रहे
खुद को जी भर जीया! 
प्रेम! तुमने क्या न दिया